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आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 24, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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rajkumar pandey
11 साल 6 महीने पहले
menace of misleading advertisements should be checked by ministry of consumer affairs in association with NGOs, but there should be transparency in ministry's dealing with NGOs. Most of the ministry officers who deal with NGOs are accused of bribery and other corruption. despite 7 months of Modi government we are yet to see list of NGOs and details of their activities on central ministry websites. when we will see any difference between congress and bjp, on regulation of NGOs ?
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Madhusoodanan M
11 साल 6 महीने पहले
The greatest task for all developing cities is to find road space for the increasing number of vehicles. Introduction of two wheeler taxis is one move. This can help reduce the traffic congestion, fuel or energy conservation, employment generation at minimum investment etc. Submitted for your consideration.
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Sanjeev Gupta
11 साल 6 महीने पहले
ok
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Amit Srivastava
11 साल 6 महीने पहले
One humble request to the judicial community and NGOs that they also take suo-moto (himself) action to protect the society from the misleading advertisements.
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narayanan s
11 साल 6 महीने पहले
Stop engaging celebraties for promoting products who seldom use one's (marketers) products ( all sports persons, film industry ) . Because of which first we,general public pay huge price which otherwise would just cost 50% less than what we pay now. Secondly products worthiness and success is not seen or shared . Any product/service should be time tested and Testimonials should be available on the Product Promotion /Marketing/Manufacturers websites.
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Sudhakar Reddy Avuthu
11 साल 6 महीने पहले
Sellers should not be allowed to sell unless they get approval from evaluation board
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Manojj Kr Vishwakarma
11 साल 6 महीने पहले
सत्यमेव जयते वाले आमिर खान, मीडिया हाउस के लोगो को , मुस्लिम धर्म कि बुराई क्यों नहीं दिखती ...............??????
देश के कुछ स्वार्थी लोग जैसे कि --- सत्यमेव जयते वाले आमिर खान, जामा मस्जिद वाले इमाम बुखारी , तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मीडिया चैनल , मीडिया हाउस के लोगो को मुस्लिम धर्म कि बुराई/ कमियां क्यों नहीं दिखती ..........???????????????
ये लोग चंद रुपयों के लालच में ,....... देश के भोले- भाले, सहनशील लोगो को गुमराह करके समाज में नफरत फ़ैलाने का घिनोना काम कर रहे हैं.
--- इनको मुस्लिम समाज कि बुराइयाँ क्यों नहीं दिखती......??????????
--- मुस्लिम समाज में महिलाओ कि कितनी ख़राब स्थिति है --- उनको नमाज पढने कि इजाजत नहीं है ............., मस्जिदों में प्रवेश करने कि इजाजत नहीं है ..................एक से ज्यादा शादी और आधिक बच्चो के कारण उनकी परवरिश, पढाई- लिखाई अच्छी नहीं हो पाती.............. महिलाओ और बच्चो के हालत ख़राब है . .
जब कि जिस हिन्दू समाज कि रीती रिवाज / धार्मिकमान्यताओ / परम्पराओ कि -- ये लोग बुराई करते नहीं थकते .--- वहां पर मंदिर में जाने पर महिलाओ पर कोई पाबन्दी नहीं........................ घर में कोई अनुष्ठान /पूजा /धार्मिक कार्य बिना महिला कि भागीदारी के होता ही नहीं...........................!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
क्या बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ये लोग मुस्लिम महिलाओ के लिए इन मुद्दों पर आवाज़ को बुलंद करने कि हिम्मत करेंगे..............................?????????????????
भवदीय
Manojj Kr. Vishwakarma... न्याय--- पुरुष
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Manojj Kr Vishwakarma
11 साल 6 महीने पहले
देश का संविधान बड़ा............ या................... धर्म ...............
.
आदरणीय देशवासिओं,
वैसे तो हमारे संविधान में कहा गया है कि--- धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा . लेकिन यहाँ तो सरेआम केवल धर्म के आधार पर भेदभाव होता है .
- एक व्यक्ति सिर्फ एक मुस्लिम धर्म से सम्बन्ध रखता है तो उस के लिए अलग कानून लागु हैं. उसके अंतर्गत काफी छूट भी है . जैसे — हज यात्रा पर सब्सिडी , जितने चाहो बच्चे पैदा करो, जितनी शादियाँ करो ,एक मिनट में जब चाहो तलाक ले लो . अगर वो हिन्दूहै तो उसके लिए इतनी सारी कानूनी बंदिशें .................!!!!!!!!!!!!!!!!!!
- सत्यमेव जयते वाले आमिर खान, दिल्ली कि जामा मस्जिद के इमाम बुखारी हो या कोई और या हाल में रिलीज़ हुई फिल्म PK .............या कोई मीडिया हाउस ...........!!!!!!!!!!!! ये सब लोग हिन्दुओ के देवी देवताओ या उनकी रीती – रिवाजो / मान्यताओ कि ही बुराई क्यों करते हैं ...............????????????? इनको मुस्लिम धर्म के लोगो कि बुराई क्यों नज़र नहीं आती ................?????????????????
- ये धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं तो क्या है...........??????????????????
वैधानिक चेतावनी – हमारे किसी जाती/ धर्म से कोई लड़ाई / कोई दवेषया कोई नफरत नहीं है . और न ही हमारा ऐसा कोई उद्देश्य है . हम तो सिर्फ इस देश के लोगो को सच से अवगत करवाना चाहते हैं.
भवदीय
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Manojj Kr Vishwakarma
11 साल 6 महीने पहले
अंग्रेजी हुकूमत कि व्यवस्था के दोष के चलते आज भी ,.. ..........मूलभूत समस्याओ के समाधान के लिए ........ ......................
December 28, 2014 at 10:47am
अंग्रेजी हुकूमत कि व्यवस्था के दोष के चलते आज भी ,.. मूलभूत समस्याओ के समाधान के लिए........ देशवासियों को ,....... अपने पर दो चार मुक़दमे दर्ज करवाने पड़ते हैं,..... बिना कसूर के अपराधी बनना पड़ता है ,..... जेल जाना पड़ता है ...... और अपना कैरिएर बर्बाद करना पड़ता है .................!!!!!!!!!!!!!!!!!!
आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी जी ,
आपके प्रयासों से शुरू हुआ स्वच्छता आभियान, घरो में शौचालय की जैसी मूलभूत समस्याओ पर जनसहयोग से आभियान के काम से, मुझे प्रेरणा और ख़ुशी मिली है. ये बाते मैंने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भी पूछी थी , लेकिन आप तो जानते हैं कि इन लोगो ने तो व्यवस्था का कितना ख़राब हाल बना डाला था .....??? , लोगो के विश्वाश का कत्ले-आम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.
हम आपका ध्यान देश के हर जिला, तहसील, क़स्बा और गावं , मोहल्ले के लोगो को परेशान करने वाली मूलभूत व्यवस्था कि गड़बड़ियो कि और आकर्षित करना चाहता हूँ. जिसके कारण देश के लोगो को मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए ,....... अपने पर दो चार मुक़दमे दर्ज करवाने पड़ते हैं,..... बिना कसूर के अपराधी बनना पड़ता है ,..... जेल जाना पड़ता है ...... और अपना कैरिएर बर्बाद करना पड़ता है .................!!!!!!!!!!!!!!!!!!
ये समस्याएं हैं जैसे कि – सड़क कि समस्या, सड़क बनी ही नहीं और टोल टैक्स कि वसूली शुरू , पानी कि समस्या, बिजली कि समस्या , बिजली की तार लटकना , हॉस्पिटल में चिकित्सा सुविधाओ कि कमी , सिविर / सफाई कि समस्या , गेस सिलिंडर कि समस्या या अन्य दूसरी समस्याओ कि जब हम सम्बंधित आधिकारियो को शिकायत करते हैं तो वे उनके निदान के लिए कोई कार्यवाही नहीं करते.
जब समस्या का समाधान नहीं होता तो परेशान लोग मजबूर होकर सड़क जाम करते हैं तो ---विभागीय आधिकारियो ( जिनकी इस समस्या के समाधान कि जिम्मेदारी है ) के खिलाफ तो कोई केस दर्ज नहीं किया जाता ............ न ही कोई ,... कार्यवाही कि जाती ................ जबकि मूलभूत समस्याओ के समाधान को लेकर सड़क जाम करने वाले लोगो के खिलाफ मुक़दमे दर्ज कर दिए जाते हैं............................. और अपराधी बना दिया जाता है...................................... पढने वाले बच्चो के खिलाफ केस दर्ज करके उनके कैरिएर पर बट्टा लगा दियाजाता है........... या ................... फिर अवैध वसूली...............?????
मतलब इस देश में मूलभूत समस्याओ के समाधान को लेकर भी , कानून अपने हाथ में लिए बिना कुछ होता नहीं ..................???????????
क्या इन आधिकारियो कि कोई जिम्मेदारी नहीं बनती............?????
आज तक देश में ऐसे अधिकारियो के खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज किये गए .............. ??? और कितने लाख मुक़दमे समस्याओ को लेकर सड़क जाम करने को बैठे लोगो के खिलाफ किये गए ................ ??? हर गाँव में ऐसे मुक़दमे मिल जायेंगे,..................... लेकिन पूरे देश में आधिकारियो के खिलाफ कोई विरला ही मुकदमा दर्ज हुआ होगा................!!!!!!!!!!!!!!!
इन समस्याओ से देश के हर जिला/ शहर/ क़स्बा/ गाँव के लोग पीड़ित और परेशान हैं. आप संसद में ऐसे कानून बनाएं ताकि इस प्रकार कि समस्याओ से देश के लोग निजात पा सकें और अंग्रेजो कि हमें गुलाम रखने के लिए बनायीं हुई व्यवस्था कि खामियों से छुटकारा मिल सके और निर्दोष लोगो कि प्रताड़ना रूक सके . जय हिन्द...........!!!
भवदीय
Manojj Kr. Vishwakarma... न्याय--- पुरुष
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VISHNU KUMAR
11 साल 6 महीने पहले
Now a days a lot of vacancies are created in Banking. Good Talents are not getting enough salary in public sector banks. After joining the Banking job, they see the work pressure. They think that there is huge amount of risk involved. No time for self and family.So, PM sir' kindly give ur kind attention towards public sector banks.
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