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Internationalization of higher education

Internationalization of higher education
Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

Globalization has resulted in greater cross border higher education. However, there is a need for a better policy that encourages collaborations, student faculty mobility etc. What ...

Globalization has resulted in greater cross border higher education. However, there is a need for a better policy that encourages collaborations, student faculty mobility etc. What are the changes necessary to bring promote internationalization of HE.

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Showing 731 Submission(s)
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
‘तत्त्वज्ञान’ ही वह 'अशेष ज्ञान’ विधान है जिसे यथार्थतः जान लेने के पश्चात् कुछ भी जानना और पाना शेष नहीं रह जाता। ‘तत्त्वज्ञान’ एकमात्र परमप्रभु हेतु आरक्षित एवं सुरक्षित विधान है | जिसका एकमात्र प्रयोगकर्ता परमात्मा-खुदा-गॉड-भगवान् ही जब परम आकाश रूप परमधाम से भू-मण्डल पर अवतरित होते हैं, हुए भी है, वह ही होते हैं । भगवदवतार के सिवाय किसी को भी ‘तत्त्वज्ञान’ के वास्तविक रहस्य का पता ही नहीं होता । यही कारण है कि भगवदावतार के पहचान का एकमात्र आधार तत्त्वज्ञान ही बना ।
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
वास्तव में तत्त्वज्ञान वह ज्ञान है जिसके अन्तर्गत पूरे ब्रह्माण्ड के जड़-चेतन तथा दोष-गुण के साथ ही साथ ‘सम्पूर्ण कर्म विधान’ तथा परिपूर्णतः योग-साधना या अध्यात्म विधान के अलावा परमतत्त्वम् रूप आत्मतत्त्वम् शब्दरूप भगवत्तत्त्वम्’ या खुदा-गॉड-भगवान् की यथार्थतः जानकारी, साक्षात् दर्शन एवं स्पष्टतः बात-चीत करते-कराते हुये परिचय-पहचान साक्षात् प्राप्त होता है; साथ ही साथ इसमें अद्वैत्तत्त्वबोध रूप मुक्ति-अमरता का साक्षात् बोध भी समाहित होता है । सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड में जड़-चेतन तथा परमतत्त्वम् आदि जो
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
दूसरे शब्दों में बड़े ही सहजता के साथ कहा जा सकता है कि खुदा-गॉड-भगवान् के द्वारा ही भू-मण्डल पर सदा-सर्वदा के लिये प्रमाणित एवं सत्यापित भगवत् परिचय एवं पहचान तथा उनके कार्य करने का विधान वास्तव में ‘तत्त्वज्ञान’ ही एकमात्र एक है । भगवान् ने इसीलिये ‘तत्त्वज्ञान’ विधान एकमात्र अपने लिये ही आरक्षित एवं सुरक्षित कर लिया । अन्ततः यह ‘तत्त्वज्ञान’ ही 'अशेष ज्ञान’ विधान भी है। तत्त्वज्ञान ही परमसत्य और सम्पूर्ण ज्ञान वाला विधान भी है । सदा-सर्वदा के लिये प्रमाणित एवं सत्यापित भगवत् परिचय एवं पहचान
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
स्वाध्याय तो मनुष्य को पशुवत् एवं असुरता और शैतानियत के जीवन से ऊपर उठाकर मानवता प्रदान करता-कराता है परन्तु यह आध्यात्मिक क्रियात्मक अध्ययन विधान मनुष्य को सांसारिकता रूप जड़ता से मोड़कर जीव को नीचे गिरने से बचाते हुए ऊपर श्रेष्ठतर आत्मा-ईश्वर-ब्रह्म- नूर-सोल-स्पिरिट दिव्य ज्योति रूप चेतन-शिव से जोड़कर चेतनता रूप दिव्यता प्रदान करता-कराता है । पुनः ‘शान्ति और आनन्द रूप चिदानन्द’ की अनुभूति कराने वाला चेतन विज्ञान ही योग या अध्यात्म है, जिसका एकमात्र लक्ष्य शरीरस्थ जीव को शरीरिकता- पारिवारिकता
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
दूसरे शब्दों में आत्मा-ईश्वर-शिव से सम्बन्धित क्रियात्मक अध्ययन पद्धति ही योग-अध्यात्म है । अध्यात्म सामान्य मानव से महामानव या महापुरुष या दिव्य पुरुष बनाने वाला एक योग या साधना से सम्बन्धित विस्तृत क्रियात्मक एवं अनुभूतिपरक आध्यात्मिक जानकारी है, जिसके अन्तर्गत शरीर में मूलाधार स्थित अहम् नाम सूक्ष्म शरीर रूप जीव का आत्म ज्योति या दिव्य ज्योति रूप ईश्वरीय सत्ता-शक्ति या ब्रह्म ज्योति रूप ब्रह्म शक्ति या आलिमे नूर या आसमानी रोशनी या नूरे इलाही या Devine Light या Life Light या जीवन ज्योति
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
1. Education 2 . स्वाध्याय (Self Realization) 3 . अध्यात्म (Spiritualisation) और 4 .तत्त्वज्ञान ; (True, Supreme & Perfect KNOWLEDGE) अथवा विद्यातत्त्वम् पद्धति ।
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 2 months ago
संसार में आनन्दमय मानव जीवन जीने के लिये स्वाध्याय एक अनिवार्य विधान है जो मानव के अन्तःकरण में मानवता का भाव एवं मानवीय गुणों को विकसित करता हुआ,शैतानियत-असुरता एवं पशुवत् जीवन से ऊपर उठाते हुए, मानवीय जीवन जीने की राह दिखाता है । सही मानव बनाता है। स्वाध्याय विधान से रहित मानव, मानव कहलाने के योग्य नहीं होता। वह या तो बालक या तो पशु या असुर या तो पागल कहलाने योग्य होता है । स्वाध्याय का विधान आध्यात्मिक महापुरुषों एवं तात्त्विक सत्पुरुष के लिये अनिवार्य नहीं होता परन्तु आध्यात्मिक महापुरुषों
ujjwal prakash
ujjwal prakash 11 years 2 months ago
We don't need international standard but problem need to internationalized so that many research and development can be actually put into action. Example :- why Indian didn't focus on their new entrepreneurial way on business ?? What is problem of non-performance of labour in industrial sector ???
KTSrinivasaRao
KTSrinivasaRao 11 years 2 months ago
Major problem of ensuring student /faculty mobility is who will meet the expenses of travel.Institutions must set up funds for meeting the travel expenses before trying for student/faculty mobility. Another way is to offer courses in collaboration with other universities like JNTU Kakinada is collaborating with Sweden