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Tune in to 121st Episode of Mann Ki Baat by Prime Minister Narendra Modi on 27th April 2025

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RakeshChauhan
RakeshChauhan 1 year 2 महीने पहले
Please make initiative so that every Indian volunteerly contributes to Indian armed forces to purchase everything which is needed at this point of time to save the country. "देश है तो शेष है" I will contribute my three months salary @ ten lakhs Dr Rakesh Chauhan Sarkaghat Mandi HP drrakeshchauhan66@gmail.com 7018724180
YourName paras mal bose
YourName paras mal bose 1 year 2 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम। यह पत्र राजस्थान की उस प्यास को स्वर देता है, जो जल के लिए तपती रेत में तड़प रही है। यह मरुधरा के किसान, जवान और बालक की पुकार है। मान्यवर, सिंधु नदी का जल पाकिस्तान की प्यास बुझाता है, जबकि हमारी धरती सूखी रहती है। 1960 की सिंधु जल संधि में भारत को सतलुज, व्यास और रावी का अधिकार है, पर हम इसका पूर्ण उपयोग नहीं कर पाए। पाकिस्तान इसका दुरुपयोग करता है और हमारी संप्रभुता को चुनौती देता है। क्या अब भी चुप रहना उचित है? लूणी नदी का पुनर्जनन लूणी, जो कभी राजस्थान की जीवनरेखा थी, आज मूक है। यदि हरिके बैराज से जल जैसलमेर तक पहुँच सकता है, तो बाड़मेर, बालोतरा और सिवाना तक क्यों नहीं? बाड़मेर के गांधव में बांध बनाकर सिंधु जल को लूणी में प्रवाहित करें, तो यह कृषि, पेयजल और सामरिक दृष्टि से क्रांतिकारी होगा। आपका एक निर्णय रेगिस्तान को हरा बना सकता है। यह परियोजना जल-स्वाभिमान का प्रतीक बनेगी और आपको जल-पुरुष के रूप में अमर करेगी। विनम्र अपील इस संकल्प को शीघ्र साकार करें, ताकि मरुधरा की प्यास मिटे और जल-आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न पूर्ण हो।
Gopinath Narayanan
Gopinath Narayanan 1 year 2 महीने पहले
Sir, we should replicate the Andamans model of making available drinking water and soft drinks only in 2 litre bottles. We should stop 250/330/500 ml and 1 litre bottles of beverages. This will drastically reduce plastic pollution and encourage people to use water bottles of their own.
AnandSwroopTewari
AnandSwroopTewari 1 year 2 महीने पहले
जब भी मैं भारत की ऐतिहासिक स्थलों, मंदिरों और गुफाओं को देखता हूँ, जिनकी मूर्तियाँ खंडित हैं, दीवारें क्षतिग्रस्त हैं और जिनकी आत्मा अब मौन है जिस तरह हम अपने माता-पिता की स्मृतियों को सहेज कर रखते हैं, ठीक वैसे ही हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने की आवश्यकता है। यदि आप इस अभियान की शुरुआत करेंगे, तो यह भारत के इतिहास का पुनर्जागरण होगा — एक ऐसा युग जहां भारत अपने अतीत से प्रेरणा लेकर, भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।यदि यह अभियान आपके नेतृत्व में प्रारंभ होता है, तो यह न केवल भारत के अतीत को जीवित करेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को आत्मगौरव और प्रेरणा देगा।मैं स्वयं इस प्रयास में अपना योगदान देने के लिए पूर्णतः तत्पर हूँ — विचार, संगठन, जनजागरूकता या स्वैच्छिक सेवा के रूप में। यह कार्य हमारे इतिहास का पुनर्लेखन नहीं, पुनर्जागरण होगा।एक ऐसा युग जहां भारत अपने अतीत से प्रेरणा लेकर, भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।