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Tune in to 133rd Episode of Mann Ki Baat by Prime Minister Narendra Modi on 26th April 2026

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PRAKASH TELI
PRAKASH TELI 2 महीने 2 घंटे पहले
महोदय, इस समय पूरे देश में शादी का मौसम चल रहा है। लेकिन, पिछले कुछ सालों से कई गाँवों में बहुत से नौजवानों की शादियाँ हो ही नहीं पा रही हैं; और जहाँ कहीं कुछ हद तक शादियाँ हुई भी हैं, वहाँ सिर्फ़ लड़कियों की ही शादियाँ हुई हैं। यह बड़े अफ़सोस की बात है, क्योंकि लोग अपनी बेटियों की शादी किसानों के बेटों से करने में हिचकिचाते हैं। नतीजतन, कई किसानों के बेटों की उम्र लगातार बढ़ती जा रही है। मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि आप देश के सभी नागरिकों से अपील करें कि वे अपनी बेटियों की शादी किसानों के बेटों से करने पर विचार करें। यह मेरी एक दिली गुज़ारिश है, क्योंकि आजकल लोग उन लोगों को ज़्यादा तरजीह देते हैं जिनकी पक्की नौकरी हो या जो शहरों में रहते हों—और यह तरीका यकीनन नाइंसाफ़ी है। इसके अलावा, मैं यह अपील मैं अपने लिए नहीं कर रहा हूँ। इसलिए, मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि आप मन की बात कार्यक्रम में इस गंभीर मुद्दे पर ज़रूर बात करें।
PRAKASH TELI
PRAKASH TELI 2 महीने 2 घंटे पहले
सर, हमारे देश में कौशल, नए विचारों वाले लोगों और ज्ञान की कोई कमी नहीं है लेकिन इसके लिए, कृपया www.innovate.gov.in जैसा कोई उचित मंच उपलब्ध कराएँ, या www.innovate.gov.in नाम से एक पोर्टल शुरू करें और सभी देशवासियों से इसमें भाग लेने की अपील करें। मुझे ऐसा लगता है कि मन की बात में भी इस पर चर्चा हो। यह एक अत्यंत विनम्र निवेदन है।
Anand Satsangi
Anand Satsangi 2 महीने 2 घंटे पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम। मैं आपके समक्ष एक महत्वपूर्ण सामाजिक विषय पर अपना विनम्र सुझाव प्रस्तुत करना चाहता चाहती हूँ। वर्तमान समय में बदलती सामाजिक संरचना एवं एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण अनेक नव-दंपतियों को वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों, पारस्परिक समझ एवं संतुलन स्थापित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप वैवाहिक विवाद, अलगाव तथा बच्चों एवं समाज पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। अतः निवेदन है कि देश में विवाह-पूर्व प्रशिक्षण (Pre-Marital Training) की व्यवस्था प्रारंभ की जाए, जिसे प्रारंभ में स्वैच्छिक तथा धीरे-धीरे आवश्यक बनाया जा सकता है। इस प्रशिक्षण में निम्न विषयों को शामिल किया जा सकता है: - वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियाँ एवं कर्तव्य - संवाद कौशल एवं विवाद समाधान - भावनात्मक संतुलन एवं परस्पर सम्मान - पारिवारिक एवं आर्थिक प्रबंधन - बच्चों के पालन-पोषण एवं पारिवारिक मूल्यों की समझ
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PRAKASH TELI
PRAKASH TELI 2 महीने 2 घंटे पहले
महोदय, दुनिया भर में औसत तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है, जबकि भारत में यह केवल 0.88 डिग्री ही बढ़ा है। हालांकि यह खबर सुनने में राहत देने वाली लगती है, लेकिन इसकी असलियत बेहद डरावनी है। यूनिवर्सिटी के सालाटा इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए हालिया संशोधन के अनुसार, भारत में तापमान में इस कमी का कारण प्राकृतिक नहीं, बल्कि बढ़ता हुआ प्रदूषण है। प्रदूषण के कारण हवा में बनने वाले कण सूर्य की किरणों को सोख लेते हैं या उन्हें परावर्तित कर देते हैं। इसलिए, मैं आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि मन की बात के दौरान प्रदूषण के मुद्दे पर सबको मार्गदर्शन करें।
RidhviSharma
RidhviSharma 2 महीने 2 घंटे पहले
I am Ridhvi Sharma of school aps ratnuchak .Drugs should be completely banned because they destroy the health and future of individuals, especially the youth, and harm society as a whole. Many young people fall into addiction due to peer pressure and lack of awareness, which leads to poor health, loss of education, and broken families. The government must take strict action to stop the production, sale, and use of drugs, along with spreading awareness about their harmful effects. If drugs cause so much damage to individuals and society, why should they not be completely banned?
PRAKASH TELI
PRAKASH TELI 2 महीने 3 घंटे पहले
महोदय, जब तक राष्ट्र स्वयं समृद्ध और सुरक्षित नहीं होता, तब तक व्यक्तिगत समृद्धि का कोई अर्थ नहीं है। इसलिए, मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूँ कि मन की बात के माध्यम से आप सभी देशवासियों से यह अपील करें कि वे राष्ट्रीय समृद्धि के उद्देश्य से कम-से-कम एक पहल अवश्य करें, और ऐसा करने के अपने अनुभव को आपके साथ साझा करें।
PRAKASH TELI
PRAKASH TELI 2 महीने 3 घंटे पहले
महोदय, कल, 23 ​​अप्रैल को विश्व पुस्तक दिवस मनाया गया। हमारे जीवन में पुस्तकों का जो महत्व है, वह सचमुच असाधारण है—ऐसा महत्व जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त कर पाना असंभव है। मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि मन की बात के इस संस्करण में, आप सभी देशवासियों से यह अपील करें कि वे हर वर्ष कम से कम एक पुस्तक अवश्य पढ़ें और अपने पढ़ने के अनुभवों को आपके साथ साझा करें।