Adv Praveen Pratap
4 साल 8 महीने पहले
सर
शिक्षा मानव का हक है और सरकार का फर्ज
प्राइवेट शिक्षा संस्थानों ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है,जब कोई व्यक्ति शिक्षा संस्थान को शुरू करता है तो वह सुसायटी का रजिस्ट्रेशन कराता है तो एक शपथपत्र इस आशय का देता है कि वह बिना किसी लाभ के समाज सेवा करेगा,और इस प्रकार के कई शपथ पत्र देता है।और अपने उस संस्थान को एक प्रकार से राज्य में समाहित कर देता है।
किंतु देखने को मिलता है कि वह उसके मार्फत आमजन का शोषण करता है।और शिक्षा का उच्च स्तरीय विक्रय करता है।
जो एक गंभीर अपराध है।
कृपया इस पर गौर करे
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