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Science-Society-Setu for #AatmaNirbharBharat

आरंभ करने की तिथि :
Oct 15, 2020
अंतिम तिथि :
Oct 31, 2020
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
For the realization of the Hon PM Shri Narendra Modi’s vision of Aatmanirbhar Bharat, we need to develop Science & Technology (S&T) interventions that identify the problems that ...
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1845 सबमिशन दिखा रहा है
Rajesh Kumar
5 साल 8 महीने पहले
Q4 कोका कोला व पेप्सिको जैसी पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां जिस तरह उत्पादन के समय प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करती है तथा लोगों के स्वास्थ्य को नुक्सान पहुंचाती है ये तो प्रत्यक्ष नुकसान है इनके उपभोग से जो दुध व जूस जैसे पेय पदार्थों से मोहभंग होता है जिससे डेयरी व्यवसाय व बागवानी को भी अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचाती है
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Rajesh Kumar
5 साल 8 महीने पहले
जैसे एक सीमेंट फैक्ट्री में जितनी ऊर्जा व पूंजी लगती है उतनी ऊर्जा व पूंजी में सैकड़ों चूने की भट्टी लग सकती है। चूना सीमेंट से सस्ता, सीमेंट से अच्छी गुणवत्ता , सीमेंट से कई गुणा ज्यादा मियाद, सीमेंट फैक्ट्री से कई गुणा लोगों को रोजगार, प्रर्यावरण अनूकूल होता है। दोनों का कच्चा माल भी एक है तथा उपयोग भी एक है। चीनी मिल व कोल्हू की तरह।
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Rajesh Kumar
5 साल 8 महीने पहले
Q4 जैसे एक चीनी मिल को चलाने में जितनी ऊर्जा व पूंजी की जरूरत होती है उससे कम ऊर्जा व पूंजी में सैकड़ों कोल्हूओं द्वारा चीनी से उत्तम क्वालिटी का मीठा पैदा किया जा सकता है इसके साथ साथ चीनी मिल से कई गुणा लोगों को रोजगार मिल सकता है तथा प्रर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा।
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Raj Shekhar Tewari
5 साल 8 महीने पहले
राष्ट्रीय एकता दिवस की बधाई
💐अनेकता में एकता,
यही भारत की विशेषता।💐
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Rajesh Kumar
5 साल 8 महीने पहले
Q4 एक कहावत बड़ी मशहूर है कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है। वैसे ही पश्चिम की आधुनिकता नामी विशाल सोच हमारी सनातन सांस्कृतिक विरासत को खा लिया है। पश्चिम के बड़े बड़े उद्यमों ने हमारे कुटिर उद्योगों को निगल लिया है। बड़े बड़े उदाहरण- जैसे चीनी मिलों ने गन्ने के कोल्हूओं को, सीमेंट फैक्ट्रियों ने चूने की भट्टियों को, गारमेंट कंपनियों ने हथकरघा उद्योग, माल संस्कृति ने छोटे दूकानदारों को, पालीस्टर आदि ने कपास व रेशम उद्योग को, बड़ी बड़ी फूड़ चेनों ने स्थानीय हलवाईयों को निगल लिया। क्रमशः....p2
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Shashank
5 साल 8 महीने पहले
Q2- The emerging technologies like AI, GM crops, Robotics can augment the agriculture and pave way for self sufficiency to the grassroot level. AI can be used by PACS and Cooperative banks to disburse credit to thr farmers. The same AI can be used to augment the land records and develop a dispute resolution mechanism at village level. Robotics in the field of mapping and surveillance can help in developing agro ecological model of agriculture. Digital India augments information deficit.
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Shashank
5 साल 8 महीने पहले
Q1- The Indigenous and traditional agriculture is more land oriented and less yield oriented. science and technology driven innovations should focus on increasing the yield per area. PM krishi sinchai scheme provides for micro irrigation. A suggestion of adding a component of fertigation should be introduced in the scheme. AI should be utilised in Soil health card scheme to improve recommendations. The Gram panchayats should be empowered and trained to use drone technologies for surveillance.
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Ratna wadhwani
5 साल 8 महीने पहले
Atamnirbhar bharat
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ARUN KUMAR GUPTA
5 साल 8 महीने पहले
Q4 हम सुविधाओं के गुलाम हो गये हैं। हमें आत्मनिर्भरता से ज्यादा सुविधाएं चाहिए। अगर चीन से आयात बंद कर दिया जाता है तो यह संभव है कि कई वस्तुएं मिलनी बंद हो जाएगी और कई वस्तुओं के दाम में बढ़ोतरी संभव है। उस समय आत्मनिर्भरता का मुद्दा किनारे हो जाएगा और सब अखबार और टीवी चैनलों पर सिर्फ कुछ वस्तुओं की बढ़ी कीमतों का जिक्र होता है। राजनीतिक दल भी मैदान में उतर आएंगे। अभी भी प्याज के दाम में कुछ रुपयों की बढ़ोतरी होते ही ब्रेकिंग न्यूज चालू हो जाती है। सरकार को प्याज तक आयात करनी पड़ जाती है
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Ankur Malviya
5 साल 8 महीने पहले
It is best app for protecting from coronavirus. And, the best think of of this app is that its timely updated
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