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29 जून 2025 के मन की बात कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुझाव भेजें

आरंभ करने की तिथि :
Jun 13, 2025
अंतिम तिथि :
Jun 27, 2025
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
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Dev Nandan Tripathi
1 year 1 week पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, मै मन की बात माध्यम से कहना चाहता हूं की पब्लिक डोमेन मे इंटरनेट 4G से ज्यादा नहीं होना चाहिए, इससे ज्यादा केवल रक्षा और अनुसन्धान मे दिया जाना चाहिए |
क्योंकि इससे ज्यादा होने पर जीव जंतुओ बिशेष करके पक्षियों के लिए बहुत ज्यादा नुकसान दायक है |
इसके अलावा AC के उपयोग पर भी कुछ दिशानिर्देश होने चाहिए जिससे ग्लोबल वार्मिंग कम हो तथा धरती का जो तापमान बहुत ज्यादा बढ़ रहा है उसपर कुछ नियंत्रण हो सके |
धन्यवाद 🙏🙏
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Vikas
1 year 1 week पहले
एक किताब एक देश अभियान-
हर महीने पूरे देश में एक विशेष पुस्तक पढ़ने की पहल जिससे भारत में पढ़ने की आदत बनी
माइंडफूलनेस एंड मेडिटेशन पर चर्चा -
बच्चे बुजर एवं कर्मचारी को मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के बारे में बताना योग और ध्यान के माध्यम से चिंता एवं थकान को दूर करना
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Shrikant Kamble
1 year 1 week पहले
Respected PM Modi ji.
Todays Delhi incidence of killing Neha is highely regretted. Raja Survanshi case is still extremely regretted. I hope since 1st January 2025 more than 10 such instances took place. Such acts are not healthy for India’s development. Raja Survanshi's case is appearing almost every day in many TV channels, but its not seen by many, especislly those who are psychologically affected. And they are watching some youtube channels which are backing such insidences, also advising, ladies and gents, how to do such things.
I think it's necessery to conduct free psychological councelling, especially to housewife and labours, not to such things, as they can't escape from such acts. When men or women, starts thinking on sex with other than their spouse, they gradually enter into sexual act in their mind, then they cannot see or think any thing other than some one in their mind, and they go to any stage. Hope same thing happend in Raja Survansh case. Necessery to do narco test.
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Vinayverma
1 year 1 week पहले
यह कहानी 7 दिसम्बर 1907को लाहौर में जन्मे स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायक सुखदेव राज की है, जिन्होंने शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के अंतिम क्षण तक साथ रह संघर्ष किया। आज़ादी के बहुत बाद1963 में वे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम अण्डा आ गए जहां रहकर कुष्ठ रोगियों की सेवा करते रहे, लेकिन अपनी पहचान छिपाए रखी। 5 जुलाई 1973 को उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद दुर्ग शहर के युवाओं ने उनकी प्रतिमा स्थापित की, तब गांव वालों को उसकी सच्चाई का पता चला परंतु समय के साथ स्मारक उपेक्षित हो गया। एक व्यापारी द्वारा भूमि क्रय कर प्रतिमा को ऊँची दीवारों से बंद कर दिया गया। जनता उसे भूल गई।50 वर्षों बाद भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ दुर्ग के भूपेंद्र कुमार वर्मा ने उनका इतिहास उजागर किया, जीवनी पुस्तक प्रकाशित कर स्कूलों में वितरित की, जिससे लोग उनके योगदान से पुनः अवगत हो सके हैं किंतु भूस्वामी के कारण जीर्णशीर्ण स्मारक का जीर्णोद्धार बाधित है फिर भी हर वर्ष उनकी जयंती व पुण्यतिथि पर पेंशनर संघ बिना हताश हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को खासकर स्कूली बच्चों को उनके योगदान से अवगत कराता है।
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SalmaVS
1 year 1 week पहले
Respected sir , I use this platform to share one of the crucial problem faced by our people . Now we are economically grows but what about our food security. Now a days most people are effected with food poisoning. There is enough measure in quality controlling . In most companies there no proper microbial testing . I am a microbiology graduate and there is company give training in QC department in food industry. All are asking for experience. But with out training how we get experience. I think we should take a measure for this, we have the right to consume secure food . please talk about this thank you.
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CHANDANSANJAYTRIPATHI
1 year 1 week पहले
जनजातीय महिलाओं को मातृत्व स्वास्थ्य और पोषण का संबल
धरती आबा जनजातीय अभियान के अंतर्गत जिला प्रशासन-कोरिया द्वारा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण में उच्च सुधार लाने हेतु प्रयास किये जा रहे है जिसमें शामिल 154 ग्रामों में आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दिए जाने वाले गर्म भोजन/टी.एच.आर/उबला अंडा एवं नावाचार के रूप में कोरिया मोदक पौष्टिक लड्डू का सेवन करवाया जा रहा हैl स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा लड्डू का निर्माण कर पोषण संगवारी के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार खिलाया जा रहा हैl गत 4 माह से इस पहल के तहत 2000 गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन पौष्टिक लड्डू खिलाया जा रहा है जिसमें 858 (हाई रिस्क ग्रुप-178, नॉन हाई रिस्क ग्रुप-680) जनजाति महिलाएं शामिल हैl जिनका100% ए.एन.सी. रजिस्ट्रेशन,100% संस्थागत प्रसव, 5-7% एनीमिया की दर में कमी लायी गईl तत्पश्चात जनवरी से जून2025 तक में 693 जनजाति महिलाओं का प्रसव हुआ जिसमें 95.9% (WHO के मापदंड 2.5 किलो से अधिक वजन) स्वस्थ शिशुओं को जन्म दियाl इस पहल से जनजातीय क्षेत्रों में कम वजन वाले शिशु की दर में 9.0% की भारी कमी आयीl
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KUMAR.GANAPATHIRAMAN
1 year 1 week पहले
Jaya Guru Datta our Humble Pranams PM Guruji Let Bharath Mata Keep You Happy Then Only We Will Be Happy
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Dr TASHANT ANEJA
1 year 1 week पहले
INDIA NEED TO WORK ON OLD AGE HOMES . ALL THE OLD MALE AND FEMALES DESERVE TO HAVE A PLACE TO SPEND THERE LIFE IN PEACE. INSTEAD OF GIVING FREE RASHON TO FAMILIES THAT CAN FEED THEMSELVES. PROVIDING RESOURCES TO PEOPLE ABOVE 60 YEARS SHOULD BE ENCOURAGED.
1)A REGULAR SCHOOL VISITS TO GIVE SEVA TO THEM AND HELPING THEM KNOW THAT THEY ARE NOT ALONE.
2) FREE CAMPS BY GOVERNMENT DOCTORS TO PROVIDE HEALTH CARE TO EVERY CITIZEN LIVING IN OLD AGE HOME.
3) PROVIDING THEM BASIC FOOD, CLEANING AND OTHER HELP SHOULD BE PROMOTED THROUGH GOVERNMENT APPOINTED NURSES AND NURSE HELPERS.
4) PROVIDING THEM A BIG TV TO ENTERTAIN.
5) PLAYING BOARD GAMES WITH THEM .
THATS THE ONLY SEVA WE INDIANS SHOULD BE DOING. IF IT CAN WORKS IN OTHER COUNTRIES. WHY IT CAN'T IN OUR COUNTRY.
ITS THE ONLY FREEBIE WE SHOULD BE GIVING.
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Deepali Hingne adv
1 year 1 week पहले
https://youtu.be/0Uw2HTgeRe0?si=SNCkWIQSFtA3uab_
युगोका सनातन है..
युग युग का संघर्ष है
एक युग मे तपस्या की
दूजे युग मे पीड़ा सही,
हरयुग मे स्वतंत्रता के लिए
आत्मज्ञान के बीज बोऐ,
खुन मिट्टी से सीचकर
आत्मसम्मान से लढकर
अगली पीढ़ी के लिऐ,
युही लढते बिखरते मरते
सनातन के अस्तित्व के लिए
मार्ग प्रशस्त कर चलते गऐ..
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Mandar Pandit
1 year 1 week पहले
Title: Revive the Rupee for Global Trade
Comment:
Historically, the Indian Rupee was used in countries like the Gulf, East Africa, and Southeast Asia. Why can't India revive this model today? Promoting the rupee in international trade, tourism, and remittances can reduce dollar dependence and strengthen India's global influence. With UPI going global and India’s digital infrastructure leading the way, it's time to push for bilateral trade deals using ₹. Like the Chinese Yuan, why not aim for wider rupee acceptance? A strong, trusted rupee abroad will reflect India’s growing leadership and support the vision of Viksit Bharat by 2047.
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