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28 फरवरी 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के लिए भेजें अपने सुझाव

आरंभ करने की तिथि :
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अंतिम तिथि :
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mukti swami
5 साल 5 महीने पहले
Pareeksha pr charcha tanav mukt sujhav vidyarthiyon ke liye bhut sahyogi hota hai kyonki humare pradhanmantri ke e man ker baat ek ek bchoo ke man me phuchti hai
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Kumar Bansode
5 साल 5 महीने पहले
कोरोना के खिलाफ ठोस कदम।
हमारा मिशन, कोरोना खतम।
कदम कदम बढ़ाए।
कोरोना को मिठाए।
mygov_161427466452678391.pdf
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PRIYANKAVAID
5 साल 5 महीने पहले
Namaste Sir,
I would like to discuss about tourism that have vast opportunity in India. If we can have at least good infrastructure for tourism.
Government can charge on major attractions and maintain the environment measures to preserve them. For example: Creating trails on mountains, wildlife sanctuaries, etc along with maps that can ensure safety and enhance interest for trekking. This will also interest older people who want to explore when they are retired from their duties.
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PRIYANKAVAID
5 साल 5 महीने पहले
Namaste Sir,
I would to discuss about tourism that have vast opportunity in India. If we can have at least good infrastructure for tourism.
Government can charge on major attractions and maintain the environment measures to preserve them. For example: Creating trails on mountains, wildlife sanctuaries, etc along with maps that can ensure safety and enhance interest for trekking. This will also interest older people who want to explore when they are retired from their duties.
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Praveen Agarwal
5 साल 5 महीने पहले
एक सवाल चल रहा है जहन में, बैंक से कर्ज़ लेते है, आढितियों से अग्रिम, उपज आढ़ितियों को देते है और सरकार से कर्ज़ माफी मांगते है? उसके बाद भी हैरान परेशान क्यों है? कर्ज़ माफी मांगने वाले विलफुल डिफॉल्टर क्यों नहीं हो सकते? आखिर नौकरी पेशा लोग ही डिफॉल्टर क्यों होते है? कर्ज़ माफी पर नौकरी करने वालो का हक क्यों नहीं बनता है? नौकरी करने वालो की एक ई एम आई गलती से भी भुगतान नहीं होती हो तो उसका सिविल स्कोर खराब हो जाता है लेकिन कर्ज़ माफी मांगने वालों का सिविल स्कोर क्यों खराब नहीं होता?
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Anamika soni
5 साल 5 महीने पहले
सर मेरा एक सुझाव है कि हम आज जिस प्रकार रक्तदान शिविर लगाते हैं लोगों को रक्त दान के प्रति जागरूक कर रहे हैं लोग जागरूक भी हो रहे हैं उसी प्रकार हम “देहदान” के प्रति लोगों को जागरूक करे हमने मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों से बात की और हमने जाना कि रीसर्च के लिए मेडिकल स्टूडेंट के पास मानव शरीर की कमी रहती है जिसकी पूर्ति के लिए हमें रक्तदान के साथ देहदान को भी प्रमोट करना चाहिए और हर ज़िलाअस्पताल में देहदान सेंटर बनाए जाने चाहिए इसी पहल में मैंने अपने मृत्योपरांत अपना देहदान करने का निर्णय लिया ह
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Vishal verma
5 साल 5 महीने पहले
प्रधानमंत्री जी की मन की बात को हम सुनते है और वो जो भी बातें जनता को बताते है वो जनता के भलाई की होती है और जनता के हित की होती है इसलिए हमें प्रधानमंत्री के मन की बात को सुनना चाहिए।
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VIRINDER RATTANPAL
5 साल 5 महीने पहले
Sir it is becoming very common that the grievances submitted by the public are on very dull note. Once there was time when a letter to The President or Prime minister was taken very seriously and generally rock system but today it it is becomes mockery and the applicant is subjected to harassment. We should take strict actions on such issues . Bureaucracy has also lowered its performance and public is getting harassed. Spontaneity should be restored in system to have faith in the democracy.
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ShaguShravan
5 साल 5 महीने पहले
https://youtu.be/Awn01k-bIjs
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Amarsingh
5 साल 5 महीने पहले
why navodaya vidyalay samiti is having ccs pension
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