Home | MyGov

Accessibility
ऐक्सेसिबिलिटी टूल
कलर एडजस्टमेंट
टेक्स्ट साइज़
नेविगेशन एडजस्टमेंट

स्कूल और प्रौढ़ शिक्षा में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी का संवर्धन

आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सूचना और संचार ...

शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी की सशक्त भूमिका हो सकती है। स्कू्ल शिक्षा में आईसीटी की राष्ट्रीय नीति में स्कू्ल पद्धति में आईसीटी का एक समग्र फ्रेमवर्क तैयार करने की परिकल्पना और प्रावधान किया गया है। यद्यपि ऐसे कई तौर-तरीके हैं जिनके द्वारा स्कूलों में आईसीटी को कार्यान्वित किया जा रहा है, तथापि यह अपेक्षित है कि हम सभी प्रकार की पहल में प्रौद्योगिकी का इष्टतम रूप से उपयोग करें और फायदा उठाएं ताकि गुणवत्ता और दक्षता का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। इस प्रकरण के तहत हमें यह समाधान खोजना होगा कि स्कूल और प्रौढ़ शिक्षा दोनों के लिए किस प्रकार उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी का लाभ उठाया जा सकता है और किसी भी सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीके को किस प्रकार साझा किया जा सकता है।

फिर से कायम कर देना
601 सबमिशन दिखा रहा है
Savita Kulshreshtha
Savita Kulshreshtha 11 साल 2 महीने पहले
ICT framework is not enough presently. Financially weaker schools are deprived of this facility govt. should make provision to help such schools. Sec. and sr.sec. schools students can be utilized in adult education as the take more interest in ICT. It can be their project of supw . It will ensure their social responsibility and respect for adults. Students will be entering teaching skill in this process. School should provide ICT to the parents also. ICT knowledge bank should be developed .
Ritu Rani_1
Ritu Rani_1 11 साल 2 महीने पहले
आज हर मनुष्य यह तो चाहता है कि देश को महात्मा गांधी लाल बहादुर शास्त्री जैसे देश भक्तों एवं विवेकानंद जैसे धार्मिक महापुरुषों की आवश्क्ता है जो समाज को विकसित कर सकें और भारत देश को पुन: विश्व गुरु का दर्जा दिला सकें परंतु "यह कौन माता पिता चाहता है कि वो महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और विवेकानंद जैसी महान जीवात्मा मेरे घर में पैदा हों" ? कारण क्या है केवल एक कि आज कि शिक्षा तो विद्या का रूप देना पड़ेगा जिसमे सत्य अहिंसा और धर्म का स्थान होना अनिवार्य है जो लुप्त हो चुका है ।