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शिक्षा अधूरी छोड़ने वाले अनुसूचित जनजाति छात्रों की दर में कमी लाने और साक्षरता दर को बढ़ाने के लिए उपाय

आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 05, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
घर और सामाजिक दोनों स्तरों पर शिक्षा को विकास का आधार माना जाता है। ...
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navneet jain
11 साल 6 महीने पहले
चहिये मे जब भी संसद ओर कोर्ट के काम की तुलना करता हू तो मे पाता हू हमानी कोर्ट मे जनता धन का अधिक से अधिक सम्मान दिया जाता है संसद ओर कोर्ट मे काम तो ऐक ही होता है कानून बनाना ओर पालन करवाना पर देखा जाता है संसद मे संसद सिर्फ समय का सदउयोग कम होता है पर कोर्ट मे नही
ईसलिये अब जरूरी हो गया है कि संसद मे जो भी संसद कार्यो मे व्वधान पैदा करे उसे कोर्ट मे बैठने का हुकूम दिया जाऐ ओर कोर्ट मे उसके अधिकार के साथ नही उसे ऐक आदेश दिया तुम ईतने दिनो तक कोर्ट मे बेठोगे ओर कोर्ट चल रही वव्स्था को देखोगे तुम
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navneet jain
11 साल 6 महीने पहले
हमारी संसद द्वरा ओरतो को बहुत जादा अधिकार देने के कारण आजकल सुखी द्पात्य जीवन मे अनेको मुस्किलो का सामना करना पड रहा है मे ओरतो के अधिकार ना दिये जाऐ ईसके पछ मे हू पर उन्हे दिऐ गऐ अधिकार के दुरउपयोग के विरोध मे हू सबसे पहले बात करता हू धारा 498ऐ यानी दहेज ऐक्ट के बारे ये हर लडकी वाला जानता है मेने दहेज ऐक्ट के तहत गवाही दी मेरी गवाही यदि झूठी पड जाऐ तो मुझे कुछ होने वाला नही ईसलिये लडकी वाले कहते है मेने दहेज ऐक्ट मे गवाही करा दी तो लडके वाले को बचने का मोका नही मिलेगा ईसी बात को लेकर लडके वाले
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navneet jain
11 साल 6 महीने पहले
पिछले कुछ दिनो से संसद मे हगामा होता राहाहै उस से विधेयक पेश होने पर परेशानी आती है ओर सरकार को भी कामकाज करने मे परेशानी आती है जहा तक सरकार का सवाल है सरकार चाहाती है संसद सत्र मे अधिक से अधिक विधेयक पास हो वही विपक्ष चाहाता है संसद मे हगामा होता रहे जिससे अधिक से अधिक विधेयक पास ना होसके क्योकि अधिक विधेयक पास हो गये तो हम सत्ताधारी पार्टी का विरोध काहा कर पाऐगे ईसलिये संसद मे जनता के धन की बर्बादी अधिक से अधिक होने लगी है वा काकाज कम से कम
अब समय आ चुका है कि ईस व्यवस्था को बदलना चहिये मे जब
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sharan rj
11 साल 6 महीने पहले
India has all the resource and financially strong,and the government is also using and contributing to people.but it is not reaching to the people who need it. due to lack of careless by officers,politicians,employes,etc.(generally) actually the almost all type of facilities provided by government was going to these peoples.(generally for all who r doing like this)..prof: in india any politicians, officers,etc. are not poor(excluding only some people) almost all are rich....
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Samir Bhagwat
11 साल 6 महीने पहले
Priy Pradhan Mantri ji,
http://www.ruralindiaonline.org/ I humbly request you to visit this website. It is a tiny project we have started. It will give you a pic+video+audio image of people from various walks of life. You and your team can take actions based on this.
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Sandip Baxi
11 साल 6 महीने पहले
To do anything, I think first step requires is to keep watch on the authorities. If teachers and administrators are not performing their duties properly, it will go in vain. We need loyal and sincere personalities with non-corruptible approach who can represent government in a right way.
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Vijigish V
11 साल 6 महीने पहले
To reduce dropout rate and increase ST literacy rates, the syllabus must be adapted to their needs and environment. Food, cloth and shelter are primary needs. More field trips to the forest and teach them the importance of preserving nature from encroachment is important. Training them in Bio farming is also a key step. Introduction of Agro-machinery in their region might be interesting and productive.
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Vijigish V
11 साल 6 महीने पहले
Most of the tribals live near the reserve forest area or inside the forest area. Forest watcher jobs must be reserved for tribals and use them as the guard of nature.
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Vijigish V
11 साल 6 महीने पहले
There should be a master plan for the development of each tribal area with primary focus to quality education, primary health protection and other basic infrastructure. Their land shall be protected with special rules so that other communities / people shall not be able to grab the ownership of their land with vested interests. Religious conversion should be prohibited by all means. Employment in tribal missions shall be reserved for the native people.
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Mukesh kumar
11 साल 6 महीने पहले
Majority of the Tribal are living in abject poverty mainly due to lack of education, infrastructure facilities, communications and above all health care. After 70 years of independence, there are areas which are not accessible and poor tribal people are being deprived of their rights to live in a dignified manner. The only solution is development of these areas through industrialization where these people should be made part of development and CSR fund is restricted to be used within such areas.
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