Arun Kumar Gupta
11 साल 2 महीने पहले
वेद उपनिषद रामायण गीवा पुराण जैन बौद्ध साहित्य बाइबिल र्कुआन गुरूग्रंथ सहिब आदि आदि का समप्रयगदी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में करना कराना चाहिये । जिसमें विद्यार्थियों किसी वर्ग जाति संप्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये ।
उपरोम्त सद्ग्रंथों को विभिन्न भाषाओं के अंतर्गत एक ही
धर्म की शिक्षा दीक्षा हैं -- ऐसा हो भाव भरना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहियें ।क्रमश::--bsbg.org
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