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व्यापक शिक्षा – नीतिशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, कला और शिल्प, जीवन कौशल

Comprehensive Education – Ethics, Physical Education, Arts & Crafts, Life Skills
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

हमारे छात्रों को समग्र विकास की जरूरत है जिसे केवल सूचना और अनुदेशन ...

हमारे छात्रों को समग्र विकास की जरूरत है जिसे केवल सूचना और अनुदेशन के माध्यम से अर्जित नहीं किया जा सकता। ज्ञान को मूल्यों, नैतिकता, कला का रसास्वादन, शारीरिक शिक्षा, खेल-कूद और जीवन कौशलों के सुग्राहीकरण की आवश्यकता है। यह प्रकरण खेलकूद - एकीकरण, शारीरिक शिक्षा, कला और शिल्प‍, जीविका के लिए कार्यात्मक कौशलों तथा स्कूल पाठ्यचर्या में मूल्यवान शिक्षा के ठोस तरीकों और साधनों के लिए सुझाव आमंत्रित करता है।

फिर से कायम कर देना
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Savita Arya
Savita Arya 11 साल 2 महीने पहले
वेद उपनिषद रामायण गीवा पुराण जैन बौद्ध साहित्य बाइबिल र्कुआन गुरूग्रंथ सहिब आदि आदि का समप्रयगदी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में करना कराना चाहिये । जिसमें विद्यार्थियों किसी वर्ग जाति संप्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये । उपरोम्त सद्ग्रंथों को विभिन्न भाषाओं के अंतर्गत एक ही धर्म की शिक्षा दीक्षा हैं -- ऐसा हो भाव भरना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहियें ।क्रमश::--bsbg.org
Savita Arya
Savita Arya 11 साल 2 महीने पहले
वेद उपनिषद रामायण गीवा पुराण जैन बौद्ध साहित्य बाइबिल र्कुआन गुरूग्रंथ सहिब आदि आदि का समप्रयगदी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में करना कराना चाहिये । जिसमें विद्यार्थियों किसी वर्ग जाति संप्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये । उपरोम्त सद्ग्रंथों को विभिन्न भाषाओं के अंतर्गत एक ही धर्म की शिक्षा दीक्षा हैं -- ऐसा हो भाव भरना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहियें ।क्रमश::--bsbg.org
Narendra Kumar Pal
Narendra Kumar Pal 11 साल 2 महीने पहले
वेद उपनिषद रामायण गीवा पुराण जैन बौद्ध साहित्य बाइबिल र्कुआन गुरूग्रंथ सहिब आदि आदि का समप्रयगदी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में करना कराना चाहिये । जिसमें विद्यार्थियों किसी वर्ग जाति संप्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये । उपरोम्त सद्ग्रंथों को विभिन्न भाषाओं के अंतर्गत एक ही धर्म की शिक्षा दीक्षा हैं -- ऐसा हो भाव भरना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहियें ।क्रमश::--bsbg.org
Desh Raj Sharma_1
Desh Raj Sharma_1 11 साल 2 महीने पहले
छात्रों को मूल्यों तथा नैतिकता की शिक्षा के लिए अध्यापकों को पढ़ने के विषयों के साथ शारीरिक, संगीत का विषय लेना अनिवार्य हो. चिकित्सा निरीक्षण,योग शिक्षा तथा क्राफ्ट को पढ़ाना अनिवार्य हो.खंडस्तर पर खेलकेंद्र स्थापित करना जहाँ सभी स्कूलों के बच्चे भाग ले सकें | जिस स्कूल के पास मैदान न हो पंचायत, नगर पालिका या समीप के स्कूल का मैदान उपलव्ध करवाने से शारीरक शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा|
Gagan_11
Gagan_11 11 साल 2 महीने पहले
वेद उपनिषद रामायण गीवा पुराण जैन बौद्ध साहित्य बाइबिल र्कुआन गुरूग्रंथ सहिब आदि आदि का समप्रयगदी भाव और ज्ञान विद्यार्थियों में करना कराना चाहिये । जिसमें विद्यार्थियों किसी वर्ग जाति संप्रदाय से ऊपर उठाकर भेद रहित भाव भरना सबसे प्रमुख उद्देश्य रखना चाहिये । उपरोम्त सद्ग्रंथों को विभिन्न भाषाओं के अंतर्गत एक ही धर्म की शिक्षा दीक्षा हैं -- ऐसा हो भाव भरना सभी के लिये अनिवार्य होना चाहियें ।क्रमश::--bsbg.org
vipin pal
vipin pal 11 साल 2 महीने पहले
आज के मनुष्य को हम सभी देख रहे है वो एक अच्छा नागरिक है या नहीं ये भी हम सभी वर्तमान घटनाक्रम से अच्छी तरह समझ सकते है आज का नागरिक जैसा भी है वो पूर्व की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक व घरेलु दशा का ही परिणाम है।
vipin pal
vipin pal 11 साल 2 महीने पहले
हम आज की समस्याओं से निजात पाना चाहते हैं तो इन बच्चों छात्रो के मनस्थिति व् व्यव्हार में सकारात्मक परिवर्तन लाना होगा जो उनके भीतर सेवा सद्भाव संयम सदाचार करुणा देश प्रेम मनुष्यता धैर्य सहनशीलता ईमानदारी सच्चाई जैसे भाव व् गुणों को जगाना होगा। और हम सब देखेंगे समाज में कितनी तेजी से धोखा-धडी भ्रष्टाचार घरेलु हिंसा व्यभिचार बलात्कार और आपसी झगदेकैसे खत्म हो जायेंगे।
Kishanvir Singh Shakya
Kishanvir Singh Shakya 11 साल 2 महीने पहले
The practical curriculum of moral eduction and values of Indian culture should be framed in the form of series from class VI to XII it should be implemented as a compulsory subjects The teachers for these subjects should be appointed on the basis of character ,steam and social reflects.
Seema Gupta_2
Seema Gupta_2 11 साल 2 महीने पहले
All of us feel that indiscipline among the students has become a serious problem today. I think that the whole education system which focuses only on the cramming of subjects is responsible for it. We have failed to transfer those ethics to the new generation that we got from our elders. So I strongly believe that more emphasis should be given on ethics, arts, music, yoga, sports.