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भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन की क्या भूमिका होनी चाहिए, इससे संबंधित सुझाव दें

आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 24, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
देशभर में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों का ...
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513 सबमिशन दिखा रहा है
manoj kumar
11 साल 6 महीने पहले
The items which are imported in India are not subjected to govt duties in a proper manner. There are many flaws. Many importers deliberately show theiir import cost at a relatively llower rates, thus saving duties and harming economy.Custom duty regime needs introspection. It will also help in Make In India Campaign.
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shyam murari bangur
11 साल 6 महीने पहले
a public interest petition before HIGHCOURT of respective state against such misleading add.even u can file private complaint before judicial magistrate first class.penal punishment may be possible. sm bangur advocate 9425936892
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Suprabhat Ganguly
11 साल 6 महीने पहले
Manually paddled carts known as Van Rickshaws carrying goods can be seen plying on roads in large numbers in the suburbs of Kolkata. It appears there is no restriction on the weight of goods that can be loaded on such vans as a result poor people are forced to carry unbearable load on such vans . It exposes such hapless van rickshaw drivers or pullers to possible serious physical hazards. The practice prevalent is inhuman and calls for intervention by the Govt.
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PRAFULLA CHAULIA
11 साल 6 महीने पहले
Many advertisements are not only misleading , vulgar also. I do not think freedom of expression can hurt the feeling of viewers.India is a vast country and the Government regulation is so feeble that so many unwanted and unethical advertisements are coming every day that a few voluntary consumer organisations can do little about it. Government regulatory Bodies should screen such advertisements before publication.
sodied
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Prakash Gupta
11 साल 6 महीने पहले
Rise against false propaganda.
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Anjani Kushawaha
11 साल 6 महीने पहले
Dear My Gov,
मेरे गाव में आधार कार्ड बनाने के लिए 20 से 30 रुपया प्रत्येक ब्यक्ति से जबरदस्ती लिए जा रहे है। जो लोग बिरोध कर रहे है उनका आधार कार्ड नहीं बनाया जा रहा है।
कृपया मेरे गांव में तत्काल इस पर रोक लगवॉए। ताकि इसमें सभी लोगो का आधार कार्ड बन सके। और भ्रस्टाचार मुक्त सरकारी काम हो सके। हम ग्रामवासी को आपके कार्यवाही की सीघ्र प्रतिछा है।
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Hrishikesh Mishra
11 साल 6 महीने पहले
Our city group is not discussing any thing. They all should use the platform to join together and make Swakchh Bharat Abhiyan a great success in their cities. Let us come together to volunteer at least once in a week.
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Ramesh Agrawal
11 साल 6 महीने पहले
पूर्णिया जिले में इन माहो में बढ़ रहे अपराध से चिंतित मैंने आज इसे भी लिखने का मन बनाया | इस जिले का दुर्भाग्य है सारे हीं ढीले पदाधिकारीयो का आगमन जिले में हुआ है | कहीं किसी विभाग में सख्ती है हीं नही बस सरकारी लूट तन्त्र हावी है |अच्छे दिनों की बात अब स्वप्न में भी नही है | भा जा पा ने यह मूल सीट जब से खोई है राज्य सरकार का ध्यान है भी नही क्योकि यह भा जा पा की सीट है यह सब जानते है |स्थानीय नेता के चयन प्रक्रिया के दोष के कारण सीट गई और निरकुंशता हावी हो गई इस पर केंद्र ध्यान दे |
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Ramesh Agrawal
11 साल 6 महीने पहले
भ्रामक विज्ञापनों में अब तक दोनों हीं सरकारो ने कोई अंकुश नही लगाया है और नही स्थानीय पदाधिकारीयो को इस सम्बन्ध को कोई दिशा निर्देश प्राप्त है | अखबारों टेलीविजन चैनल जिनकी पहुंच घर घर है कोई भी सामग्री बेझिझक परोसते जबकि विज्ञापन करने वाले जब तक सच से स्वयं रूबरू नही हो वे भ्रामक विज्ञापन नही करे ऐसा कई बार देख गया सुना गया किसी बड़े पदाधिकारी को अपने कार्यक्रम में बुलाकर कम्पनीयां सुर्खीयां बटोरती है और फिर स्वार्थ सिद्ध होते हीं रफूचक्कर हो जाती है थाने क्षेत्र के प्रभारी के अनुमति जरूरी करें
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Rajesh Kumar
11 साल 6 महीने पहले
Railway should not be privatized rather private work culture should be adopted. Every national highway should have rail track both side to avoid wastage of farmers lands. It will be helpful more for transportation of goods and public with low costing.
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