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जनजातीय लोगों के लिये आजीविका के अवसर

Livelihood opportunities for tribal people
आरंभ करने की तिथि :
Feb 10, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 01, 2016
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

जनजातीय लोगों के लिये आजीविका के अवसरों की कमी अन्य सामाजिक गुटों की ...

जनजातीय लोगों के लिये आजीविका के अवसरों की कमी अन्य सामाजिक गुटों की तुलना में उनके पिछड़ेपन का एक मुख्य कारण है। कई औद्योगिक परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में इनका विस्थापन होता है जिससे भी जनजातीय लोगों की आजीविका पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह मंत्रालय जनजातीय लोगों के लिये विभिन्न क्षेत्रों में स्थायी आजीविका सुनिश्चित कराने के लिये कई कदम उठा रहा है। जनजातीय नौजवानों के लिये व्यावसायिक शिक्षा तथा औपचारिक तकनीकी शिक्षा पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। राज्यों को जनजातीय नौजवानों के लिये उनके कौशल के विकास हेतु कदम उठाने को कहा गया है, जिनमें कम से कम आधे कौशल महिलाओं को रोजगार दिलाने वाले हों।

जनजातीय मंत्रालय, मेरी सरकार के माध्यम से इन मुद्दों पर समाज के विभिन्न वर्गों के सुझाव तथा सूचनाऐं आमंत्रित कर रहे हैं - जनजातीय लोगों के लिये आजीविका के विभिन्न अवसर, विभिन्न क्षेत्रों में कुशल किंतु बेरोजगार जनजातीय नौजवानों की उपलब्धता, जनजातीय लोगों के पारंपरिक कौशल, जनजातीय नौजवानों मे नयी रुचियाँ तथा नये रुझान, तथा सम्बद्ध कौशल–विकास की ज़रूरतें और सम्भावनाऐं।

फिर से कायम कर देना
694 सबमिशन दिखा रहा है
Bhupendra Menaria
Bhupendra Menaria 11 साल 1 महीना पहले
मेने जो अभी निचे 6 पोस्ट करी है उन्हें "माननीय PM " वाले पेरेग्राफ से निचे से ऊपर की तरफ पढ़े और कुछ मदद हो सकती हो तो कृपा करके मदद करे !!! अगर इस योजना को आगे बढ़ाया जाए तो लाखो किसानो को एक आत्मनिर्भर जिंदगी हम दे सकते है !!! योजना बहुत छोटी है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम निरन्तरता में फल देने वाले होंगे !!! हम केवल सागवान लगवाकर निम्न योजनाओ पर काम कर सकते है वो भी एक साथ 1 बेटी बचायेंगे 2 भूमि को बंजर होने से रोक सकते है 3 पर्यावरण बचाया जा सकता है ! 4 गरीब किसान को धनवान बनायेगे !
Bhupendra Menaria
Bhupendra Menaria 11 साल 1 महीना पहले
और पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में भी ये अभूतपूर्व पहल होगी ! केवल अकेले सागवान से इतने फायदे है , किसान भी सक्षम होगा , बेटियाँ भी बचेगी और पर्यावरण भी !! अतः आपसे निवेदन है की सागावन के टिशु कल्चर पोधो को निशुल्क उपलब्ध कराने का कष्ट करे !!!
Bhupendra Menaria
Bhupendra Menaria 11 साल 1 महीना पहले
दूसरी बात एक एकड़ जमींन में 10 - 10 फिट की दुरी रखते हुए लम्बाई और चौड़ाई में लगभग 600 पोधे लगते है , बिच के अंतराल में हम गेहू मक्का और दूसरी फसल भी प्राप्त कर सकते है ! सबसे महत्वपूर्ण बात यह की सागवान के पत्तो से जमीन में एक विशेष प्रकार की जीवाण्विक क्रिया होती है जो की जमींन को 60 गुना तेजी से ओरगेनिक बनाती है जिसके तहत हम 5 साल बाद पूर्ण रूप से ओरगेनिक खेती भी कर सकते है !! इसी ओरगेनिक जमीन पर किसान ओरगेनिक फल सब्जियां उगाकर अपनी आमदनी बढ़ा सकता है !!!
Bhupendra Menaria
Bhupendra Menaria 11 साल 1 महीना पहले
पहली बात प्रधानमन्त्री बेटी बचाओ अभियान में यही सागवान एक अभूतपूर्व कदम होगा क्योकि आज भ्रूण हत्या का प्रमुख कारण पैसो की तंगी भी है इसीलिए मेने एक स्लोगन भी बनाया है "सागवान लगायेगे, बेटी बचायेंगे " ! किसी किसान के घर बेटी पैदा होती है तो उस किसान से 500 पोधे लगावाईए ताकि जब बेटी बड़ी हो तो उसके पढ़ाई लिखाई और शादी का खर्चा यही सागवान उठाएंगे !!
Bhupendra Menaria
Bhupendra Menaria 11 साल 1 महीना पहले
मेरी सागवान लगवाने वाली प्राइवेट लिमटेड कंपनी से बात भी हो चुकी है और सागवान का एक टिशु कल्चरल पौधा 80 रूपये का आ रहा है और में चाहता हूँ की गाँव का हर किसान सागवान के 500 पोधे लगाये और यही सागवान किसान को 10 साल बाद कम से कम 2.25 से 2.50 करोड़ रूपये देगा !!
Bhupendra Menaria
Bhupendra Menaria 11 साल 1 महीना पहले
माननीय PM महोदय में राजस्थान में उदयपुर जिले में मेणार् गाँव का रहने वाला हूँ और पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर हूँ ! में अपने गाँव में सागवान के पोधे लगवाना चाहता हूँ ! सागावन का एक पौधा कम से कम 10 साल में बड़ा होकर इमारती लकड़ी के रूप में काम में लिया जा सकता है ! सागवान के एक पोधे से आज की तारीख में 40 हजार रूपये की आय होती है जो की दस साल बाद बढेगी ही !!
DR MANIK DIXIT
DR MANIK DIXIT 11 साल 1 महीना पहले
Need to bring the tribals in the loop of Ayurveda industry simply because they are closest to the nature !! Engage them in herb cultivation and plantation. Allot them Desi Cows for rearing, and mechanism on model of cooperative may be put in place to collect the PANCHAGAVYA of DESI COWS and made available to Ayurveda pharma industry, which needs good quality desi cow panchagavya like milk, ghee, gomutra, dung etc for proper preparation of Ayurveda medicines. Good source of livelihood for tribals
pradeep Shah
pradeep Shah 11 साल 1 महीना पहले
On 26-4-15 in his speech Maan Ki baat Respected PM Mr Narendra Damodardas Modi emphasized on MAYLA MATHE PE DHONA (carrying dirt on head). The phrase was headline in each and every NEWS of the day. Is He really concern about this and made provisions of reservation in LOK SABHA, RAJYA SABHA, STATE VIDHAN SABHA, MILITARY etc etc etc ...... Such reservations are in place in other aspects of life. Respected PM Mr NARENDRA DAMODARDAS MODI SIR do you have explanation or just a speech.