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आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 15, 2014
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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ashish kumar
11 साल 8 महीने पहले
पाया कि आरोपियों को कौन-सी कोर्ट में पेश किया गया। एसओ सेक्टर-20 रीता यादव ने बताया कि इंजीनियर्स को यह शक था कि आरोपियों को कोर्ट में पेश नहीं किया गया, जिसके चलते उनमें रोष था। हंगामे की सूचना के बाद प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तारी के बारे में बताकर समझा बुझाकर शांत करवाया गया। कुछ देर के लिए जाम की स्थिति पैदा हुई थी, लेकिन इंजीनियर्स के हटते ही हालात सामान्य हो गए।
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Swapnil Purwar
11 साल 8 महीने पहले
Aaj National Cancer Awareness Day Hai, Meri Wife Ko Bhi Ye Rog Hai , Mere Saamne Bahut Saare Case Aise Hai Jinhe Jaankari Na Hone Ke Karan Galat Ilaaz Karalete Hai Aur Baad MAin Unhe Galti Ka Ahsaas Hota Hai , Kyo Na Hum Apne Sahar Main Ek Cancer NGO Chalaye Jo Ki Public Ko Cancer Sambandhi Jaankari De Aur Logo Ko Sahi Rasta Bataye . Yadi NGO Chalu Karne Main Aap Meri Koi Madad Kar Sakte Hai To Plz Bataye .
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ashish kumar
11 साल 8 महीने पहले
महीने की ट्रेनिंग दी गई और न ही कोई जॉब। पैसा वापस मांगने पर उन्हें टरकाया जा रहा था। उसके बाद बुधवार को कंपनी मैनेजमेंट के खिलाफ उन्होंने सेक्टर-20 पुलिस स्टेशन में शिकायत की थी।
उधर, गुरुवार शाम को ठगी का शिकार हुए इंजीनियर्स ने झुंडपुरा चौकी के सामने पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया। ठगी का शिकार हुए मुरारी कुमार ने बताया कि उन्हें पुलिस ने बताया था कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों को गुरुवार को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश किया जाएगा। लेकिन कोर्ट जाने पर उन्हें कोई मदद नहीं मिली, न ही उन्हें यह पता चल
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ashish kumar
11 साल 8 महीने पहले
करीब 300 इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर्स को जॉब के नाम पर ठगने के आरोप में पुलिस ने दो आरोपियों सौरभ वर्मा और चंद्र प्रकाश को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि पुलिस कंपनी के मालिक को पकड़ने में अभी कामयाब नहीं हो सकी है। इंजीनियर्स की शिकायत के आधार पर सेक्टर-20 पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। उसके बाद दो आरोपियों को पुलिस ने बुधवार शाम पकड़ा था। इंजीनियर्स ने आरोप लगाया था कि सेक्टर-8 की इस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने उनसे बॉन्ड भरवाकर 30-30 हजार रुपये ले लिए थे। बॉन्ड के हिसाब से न तो उन्हें तीन
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RAJESH GOSWAMI
11 साल 8 महीने पहले
झ) गोधन को सम्मान मिलेगा (कुछ लोग गाये बैल को काम न करने पे आवारा छोड़ देते है ) तो शायद लोग ये सोचे किसी गोधन को आवारा छोडने से पहले की अब ये गोधन काम का नहीं है परन्तु गोबर और मूतर तो दे रहा है जो हमारे खेतों और घरों के लिए काफी फायदेमंद है
ट) पशुओं के मूतर में अगर नीम के पत्ते मिला कर फसल पर छिड़का जाये तो हमे कीटनाशक प्रयोग करने की जररूत नहीं
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RAJESH GOSWAMI
11 साल 8 महीने पहले
च) यूरिआ तथा डी ए पी पर नहीं डालेंगे तो बीमारियां भी काम होंगी (क्योंकि केमिकल युक्त खाद से उत्पन्न अनाज खाने से रोग प्रतिरोध क्षमता काम होती है तथा धरदी माँ बंजर बनती है)
छ) इस सव्देसी प्रयोग से सबसे बढ़ा फायदा है की गावं का पैसा गावं में रहेगा यूरिआ,डी ए पी तथा कीटनाशक दवाओं में नहीं लगेगा)
ज) हमारी माताओं बहनो को भी गोबर के उपले बनाने से आराम मिलेगा
झ) गोधन को सम्मान मिलेगा (कुछ लोग गाये बैल को काम न करने पे आवारा छोड़ देते है ) तो शायद लोग ये सोचे किसी गोधन को आवारा छोडने से पहले की अब
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RAJESH GOSWAMI
11 साल 8 महीने पहले
ख) गावों को एलपीजी के लिए गैस कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
ग़) अगर गैस उत्पादन ज्यादा होता है तो हम उस को गांव में बिजली पैदा करने में इस्तेमाल कर सकते है
घ) गोबर गैस प्लांट से निकली खाद से हम अपने खेतों की उपजाऊ सक्ति बढ़ा सकते है (इस प्रकार की खाद जैसी उर्वरक सक्ति किसी भी उर्वरक में नहीं)
ड) हमे यूरिआ तथा डी ए पी पर निभर्र नहीं रहना पड़ेगा
च) यूरिआ तथा डी ए पी पर नहीं डालेंगे तो बीमारियां भी काम होंगी (क्योंकि केमिकल युक्त खाद से उत्पन्न अनाज खाने से रोग प्रतिरोध क्षमता काम होती ह
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RAJESH GOSWAMI
11 साल 8 महीने पहले
मै सांसद आदर्श गांव योजना के बारे कुछ आईडिया देना चाहता हूँ
१.हम गावों की स्वछता और आतमनिर्भत्त के लिए गावों में गोबर गैस प्लांट को प्रोत्साहित करे
ये हम सामूहिक तोर पर एक एक मोहल्ले के लिए भी लगा सकते है और घर विशेष के लिए भी
२.इसमें हम सामूहिक प्लांट में प्रति दिंन अगर मापी हुई मात्रा में गोबर डाले और बदले में गोबर वाले को गैस सिलेंडर या बायो गैस का कनेक्शन दिया जाये तो इससे हम और निम्नलिखित फायदे ले सकते है
क) गावों में गोबर जगह जगह नहीं बिखरेगा (खासकर बरसात के दिनो में )
ख) गावों को एलपी
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Arvind Agarwal
11 साल 8 महीने पहले
No govt institution is looking for MSME or small sec skill development.If some r doing that too on obsolete technology wasting country money and natural resources.
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Arvind Agarwal
11 साल 8 महीने पहले
Our institution giving no help to MSME. We can not test our incoming and out going material due to very high charges and slow working. Institutions no contributions for MSME product development not even energy saving and echo friendly technology pl see
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