Manoj Gautam
11 years 2 months ago
अच्छे कार्यों के करने में जिस किसी भी मनुष्ष्य पर कठिनाइयाँ एवं परेशानियाँ आवें तो यह अवश्य ही जान व मान लेना चाहिये कि यह उसके मानवता की परीक्षा यानी मानवता का परिक्षण हो रहा है।
"यदि वह साहसपूर्वक सहिष्णुता के विधान से दृढ़ता पूर्वक अपने अच्छे पथ या विधान पर स्थिर रहता है तो निश्चित् ही उस परीक्षण में पास होता हुआ वह मानवता के अगली श्रेष्ठतर श्रेणी की तरफ
निःसंदेह उठ रहा है । इसमें सन्देह तो कदापि न करें ।"
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